हाई कोर्ट पहुंचा कपिल सरोवर कोलायत में अतिक्रमण का मामला

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों से किया जवाब तलब

हाई कोर्ट पहुंचा कपिल सरोवर कोलायत में अतिक्रमण का मामला

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों से किया जवाब तलब

जोधपुर। बीकानेर जिले के श्री कोलायत में औरण एवं आरक्षित वन संपदा कपिल सरोवर में किए जा रहे अतिक्रमण और निर्माण के मामले में राजस्थान हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी और न्यायधीश मदन गोपाल व्यास की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता राजाराम व हरिलाल की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता विपुल सिंघवी ने कहा कि राज्य सरकार ने कपिल सरोवर कोलायत की आरक्षित वन घोषित किया गया था। जिसके फलस्वरूप यह वन क्षेत्र वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अनुसूची 5 राजस्थान का थार, मरुस्थलीय पक्षियों और स्तनपोशी जीवों का जैव मंडल का रिजर्व अंचल घोषित है। जो कि भारत सरकार द्वारा नियंत्रित है। उच्च न्यायालय के पूर्ववर्ती आदेशानुसार भी यह वन संपदा गैर वानिकी प्रयोजन के लिए प्रतिबंधित कर दी गई है। फिर भी वर्तमान सरपंच ने खसरा संख्या 30 की इसी आरक्षित वन संपदा 1362 बीघा 9 बिस्वा में 127 आवेदकों के प्रार्थना पत्र अनुमोदित करें दुकानों और व्यवसायिक प्रतिष्ठान के पट्टे जारी कर दिए हैं। यह आबादी भूमि नहीं है। मौके पर अवैध दुकानों का निर्माण करवाया जा रहा है। शोभाऊ दवार और सड़के बनवाई जा रही हैं। बस स्टैंड की आड में विकास का बहाना कर जल बहाव क्षेत्र, नदी और जल भराव क्षेत्र को नष्ट कर दिया गया है। मौके पर विद्यमान असंख्य संघन और गहरे वृक्षों को कटवा दिया गया है। ग्राम पंचायत का यह कृत्य वन संरक्षण अधिनियम 1980 तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की अवहेलना है।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार के राजस्व, पंचायती राज व वन विभाग के प्रमुख सचिव, बीकानेर जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त व अन्य उच्च अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का आदेश दिया है।