नेशनल हाईवे का भयावह दर्शय, धीमी वर्षा मे सड़क के बीच एक महिला तंत्र - मंत्र पढ़ने लगी।

सबसे हटकर - सबसे अलग, सत्य के साथ राजस्थान की आवाज।

नेशनल हाईवे का भयावह दर्शय, धीमी वर्षा मे सड़क के बीच एक महिला तंत्र - मंत्र पढ़ने लगी।

बांसवाड़ा के जयपुर रोड पर रात 12 बजे सड़क पर कुछ अजीब सी चीजें देखकर लोग डर गए। नेशनल हाईवे 113 पर शुक्रवार को सड़क पर एक महिला गुलाबी रंग के कपड़े और सिर पर चुन्नी ओढ़े दिखाई दी। हल्की-हल्की बारिश भी हो रही थी। वो रात के सन्नाटे में अजीब-अजीब सी आवाज निकाल रही थी। सड़क से गुजरने वाले कुछ लोगों ने अपनी गाड़ी रोककर जानना चाहा तो महिला मंत्र पढ़ने लगी।

कुछ लोगों ने महिला के पास जाने की कोशिश की तो वो जोर-जोर से हंसते हुए आकाश की ओर हाथ करके कुछ कहने लगी। जिससे वहां मौजूद लोग डरकर भाग खड़े हुए। राजस्थान की आवाज ने मामले की पड़ताल की तो पता चला कि महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त थी। जो रात में अनजान लोगों से बचने के लिए ऐसी हरकतें करती दिखाई दी।

SP आवास से 100 मीटर दूर विक्षिप्त महिला का सड़क के बीच में बैठकर लोगों को डराने का यह मामला बांसवाड़ा SP कॉवेंद्रसिंह सागर के सरकारी आवास से करीब 100 मीटर दूर का है। अंबेडकर सर्किल से कुछ आगे जिला उद्योग केंद्र के आगे रोड लाइटें नहीं हैं। हल्की रोशनी के बीच बैठी महिला और उसकी हरकतें किसी को भी डराने के लिए काफी थी। करीब 10 मिनट तक राजस्थान की आवाज की टीम इसी जगह पर खड़ी होकर महिला की तस्वीर को मोबाइल पर लेने की कोशिश करती रही। यह देख महिला ने डराने के अलावा पीछे दौड़ने की कोशिश भी की। इस बीच दो बाइक सवार वहां से गुजरे। ब्रेक मारने के साथ ही डर के मारे वह भाग गए। जयपुर से बांसवाड़ा की ओर आते हुए ट्रक चालक ने महिला को देखकर पूरा ट्रक एक ओर घूमा लिया। महिला करीब दो घंटे तक वहां बैठी रही। इसके बाद वह कहां गई। किसी को नहीं पता।

लॉकडाउन में बढ़ी ऐसी महिलाओं की संख्या :

लॉकडाउन के दौरान मानसिक विक्षिप्त महिलाओं की शहर में संख्या बढ़ी है। केवल कस्टम और पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में ऐसी महिलाओं की संख्या तीन से अधिक है। इनमें से कुछ महिलाएं तो शांत स्वभाव की हैं, जबकि कुछ महिलाएं पिछले दिनों दुकानदारों पर पत्थर भी फेंकती देखी गई। इनमें से कुछ महिलाओं को तो नगर परिषद के दल ने पकड़कर दूसरी जगह छोड़ा। बांसवाड़ा में अनाथ आश्रम और पागल खाने के अभाव में ऐसी महिलाओं को सुरक्षित रखने का भी संकट बना हुआ है। जानकारी के बावजूद प्रशासन स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

मामले में नगर सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि ऐसे मामले में नगर परिषद विक्षिप्त के परिजनों की तलाश करने के प्रयास करती है। यह प्रयास सफल नहीं होने पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के साथ जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी जाती है। सीधे तौर पर परिषद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर सकती।