कितना घातक है मोबाइल एडिक्शन 

सबसे हटकर - सबसे अलग, सत्य के साथ राजस्थान की आवाज।

कितना घातक है मोबाइल एडिक्शन 

कितना घातक है मोबाइल एडिक्शन 

 वेब पोर्टल पर एक समाचार पढा "मोबाइल गेम ऐडिक्ट युवक ने पिस्तौल की गोली से की आत्महत्या"। 
बच्चों की मानसिक शक्ति, मानसिक विकास की दिशा, और सामाजिक सरोकार से जुङा विषय है, इसलिए  इस विषय की  जन मानस के समझने योग्य समीक्षा करने की इच्छा हुई कि परामर्श समाजोपयोगी हो सके। 
  ©-- ऐप्स व मोबाइल फोन गेम्स बच्चों के शिक्षा के क्षेत्र में बाधक तो है ही..कैरियर निर्माण में भी बाधक होता है,शारीरिक व मानसिक रूप से  इस प्रकार के घातक दुष्परिणाम भी है।।
 बच्चों को विशेषतः किशोरावस्था में एंड्रोएड सेल फोन रखना ही नहीं चाहिए।
©- यदि रखें तो शिक्षा के क्षेत्र में अपडेट रहने व करंट अफेयर्स के ज्ञान के लिए ही इन्टरनेट का आवश्यकतानुसार उपयोग करने की छूट देनी चाहिए।अभिभावकों को थोङी बहुत निगरानी भी रखनी चाहिए कि बच्चा सेल फोन का प्रयोग कैसे, कितने महत्व का कर रहा है। 
©-अक्सर अभिभावकों का कथन रहता है कि "क्या करें बच्चे कहना नहीं मानते".... इस समस्या का निराकरण भी अभिभावकों को ही करना पङेगा। वो स्थितियां ही उत्पन्न नहीं होने दें कि बच्चा इस स्तर पर पहुंच जाये कि वह एंड्रोएड फोन एप्पस गेम्स करने के लिए  माता पिता का कहना नहीं माने।माता-पिता की सलाह की अवहेलना करे। 
यह स्थिति उत्पन्न होने के बाद  हल करना कठिन होती है बजाय स्थिति का परिहार रखने के लिए।
इस अवस्था तक पहुंचने पर चारों ओर हानि ही है।
©-बच्चे एप्पस के ऐडिक्ट हो जाते हैं
©-कैरियर के प्रति जागरूकता नहीं रहती
©- सेल फोन एप्पस मे लीन रहने वाले बच्चे घर का काम नहीं करते करते हैं तो आधा अधूरा जल्द बाजी में.. यही शैली जो बालपन में ही आदत में जाती है वही जीवन  में उतरती है और अस्त व्यस्त जीवन शैली बन जाती है।
©-सामाजिक परिपेक्ष्य में भी ऎसे बच्चे सोसाईटी से कटे कटे रहते हैं। सामाजिक रिश्ते कम ही बना पाते हैं। 
©-चिङचिङा पर और कालांतर में क्रोधी प्रवृति इसका परिणाम है। ज्ञान के प्रति जिज्ञासा, सीखने की प्रवृति,व एकाग्रता का ह्रास होता है। 
©-अंतर्मुखी और शंकालु प्रवृति के बच्चे जो अपनी अभिव्यक्ति नहीं कर सकते वे फ्रस्ट्रेशन का शिकार होकर गलत कदम उठा लेते हैं। 
©-इनसे विपरीत बच्चे अपने रहन सहन में भाषा में विनम्रता नहीं रखते,इन्ही में से कोई खराब संगत वाले अपराध का मार्ग पर चल पङते है। 
सारांशतः अपने बच्चों के अच्छे संस्कारों के बीजारोपण व उज्जवल भविष्य के लिए बच्चों को एप्पस एडिक्शन से बचाना अत्यंत आवश्यक है।इसके लिये घर परिवारों में अच्छा वातावरण रहे... विद्यालयों में भी अध्ययन का वातावरण रहे। अध्ययन को रूचिकर बनायें, विज्ञान आधारित प्रायोगिक ज्ञान दिया जाना चाहिए जिससे बच्चों में जिज्ञासा हो और उनका ध्यान इधर उधर नहीं भटके।  तथ्यों की स्पष्टता व पुष्टि से परे, कुंठा युक्त विचार मष्तिक में घर नहीं करें, पढने लिखने व कैरियर बनाने की दिशा में ही ध्यान रहे। 

श्री घनश्याम शर्मा से. नि. अतिरिक्त निदेशक की प्रेरणा से लीलाधर शर्मा वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी गुसांईसर चूरू द्वारा लिखित लेख