कृषक उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसान कृषि प्रसंस्करण, मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर करें फोकस

सीकर में जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक का आयोजन

कृषक उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसान कृषि प्रसंस्करण, मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर करें फोकस

कृषक उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसान कृषि प्रसंस्करण, मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर करें फोकस

_सीकर में जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक का आयोजन_

सीकर। 10000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन और संवर्धन हेतु केंद्रीय क्षेत्र योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय निगरानी समिति (डी-एमसी) की बैठक मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद सीकर सुरेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई। सहायक महाप्रबंधक, नाबार्ड एवं सदस्य सचिव जिला स्तरीय निगरानी समिति (डी-एमसी), एम एल मीना ने सभी सदस्यों का बैठक में स्वागत करते हुये बताया कि इस योजना के अंतर्गत सीकर जिले में अब तक सात ब्लॉकों में कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन किया जा चुका हैं। इन एफपीओ के गठन और संवर्धन के लिये क्लस्टर आधारित व्यापार संगठन (सीबीबीओ) के रूप मे धोद एवं पिपराली ब्लॉक में इंडियन ग्रामीण सर्विसेज; लक्ष्मणगढ़, श्रीमाधोपुर एवं पलसाना ब्लॉक में सिनर्जी क्रॉपसाइंस प्राइवेट लिमिटेड; और खंडेला एवं पाटन ब्लॉक में सोसायटी ऑफ इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर रूरल डेवलपमेंट का चयन संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा किया गया हैं। इस अवसर पर जिला स्तरीय समिति द्वारा कृषक उत्पादक संगठनों की संबंधित प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई एवं सभी सीबीबीओ से कहा कि किसान उत्पादक संगठन जिले में कृषि प्रसंस्करण, मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर फोकस करे ताकि किसानों की आय में वृद्धि की जा सकें।

सहायक महाप्रबंधक नाबार्ड एम एल मीना ने 10,000 एफपीओ के गठन और संवर्धन के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजना के दिशानिर्देशों को विस्तार से बताते हुए कहा कि कृषक उत्पादन संगठन के संवर्धन के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु नए एफपीओ को वित्तीय सहायता अधिकतम 18 लाख रुपये प्रति एफपीओ या वास्तविक, जो भी कम हो, गठन के वर्ष से तीन वर्षों के दौरान प्रदान किये जाने का प्रावधान हैं एवं संबधित सीबीबीओ को 25 लाख रुपये प्रति एफपीओ प्रदान किए जाने का भी प्रावधान हैं। भारत सरकार इस योजना के तहत कृषक उत्पादक संगठन को मैचिंग इक्विटी ग्रांट के रूप में अधिकतम 15.00 लाख रुपये प्रति एफपीओ तक प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा कृषक उत्पादक संगठनो को संस्थागत ऋण के प्रवाह में तेजी लाने के लिए उपयुक्त क्रेडिट गारंटी कवर प्रदान करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये का क्रेडिट गारंटी फंड (सीजीएफ) नाबार्ड मे स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से बैंको द्वारा दिये गए ऋण पर नाबार्ड क्रेडिट गारंटी कवरेज प्रदान करेगा। 

मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद सीकर और अध्यक्ष, डी-एमसी सुरेश कुमार ने सभी संबंधित सीबीबीओ को निर्देश दिये कि कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा निर्धारित सभी लक्ष्यों को समय सीमा के अंदर पूर्ण करना सुनिश्चित करें। साथ ही, उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि संबधित ब्लॉक में सीबीबीओ द्वारा ग्राम स्तर पर ज़्यादा से ज्यादा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जायें ताकि अधिक से अधिक संख्या में किसानो को एफ़पीओ से जोडा जा सके। बैठक मे उपस्थित समिति के सभी सदस्यों से उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग जिले में कार्यरत सीबीबीओ को किसान उत्पादक संगठनों के गठन एवं संवर्धन हेतु आवश्यक सहायता प्रदान करें।

सहायक महाप्रबंधक नाबार्ड एम एल मीना ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ ब्लॉक में गठित किए गए लक्ष्मणगढ़ कृषि फेड प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड (एफपीओ) को भारत सरकार द्वारा हाल ही में 6.04 लाख रूपए की मैचिंग इक्विटी ग्रांट के रूप में पहली किश्त जारी की गई हैं।

इस अवसर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद सुरेश कुमार, आईएएस अधिकारी गुंजन सिंह एवं सहायक महाप्रबंधक एम एल मीना ने खंडेला एवं पाटन ब्लॉक में गठित एफपीओ के प्रतिनिधियों को एफपीओ का रेजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र भी प्रदान किया।

जिला स्तरीय निगरानी समिति (डी-एमसी) की बैठक के दौरान उप निदेशक कृषि विस्तार अजीत सिंह, संयुक्त निदेशक कृषि विपणन दयानन्द सिंह, अग्रणी जिला प्रबंधक तारा चंद परिहार, परियोजना निदेशक आत्मा सत्यनारायण गढ़वाल, अध्यक्ष कृषि विज्ञान केन्द्र फतेहपुर डॉ. हरफूल सिंह तथा पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग, सीबीबीओ एवं एफपीओ के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।